Waqf Bill 2024: 2 और 3 अप्रैल 2025 को भारतीय संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर बहस और मतदान की उम्मीद है, जो 1995 के वक्फ कानून में व्यापक बदलाव लाने की तैयारी में है. यह विधेयक न केवल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को प्रभावित करेगा, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम भी हो सकते हैं.
आइए जानते हैं कि वक्फ क्या है, इसका इतिहास क्या है, और यह विधेयक मुसलमानों के लिए फायदा पहुंचाएगा या नुकसान? साथ ही, सरकार के दावों और विपक्ष-मुस्लिम समुदाय की चिंताओं पर भी गहराई से नजर डालते हैं.
वक्फ क्या है और इसका इतिहास
वक्फ वह संपत्ति है जिसे इस्लामिक कानून के तहत धार्मिक या दान से जुड़े उद्देश्यों के लिए समर्पित किया जाता है. एक बार वक्फ घोषित होने के बाद यह संपत्ति किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं रहती, बल्कि अल्लाह के नाम समर्पित हो जाती है, और इसे वापस नहीं लिया जा सकता. भारत में वक्फ की शुरुआत दिल्ली सल्तनत के दौर से हुई, जब सुल्तान मुहम्मद गोरी ने मुल्तान की जामा मस्जिद के लिए दो गांव दान में दिए थे. इसके बाद इस्लामिक शासन के विस्तार के साथ वक्फ संपत्तियां बढ़ती गईं.
वक्फ की संपत्ति
आज, वक्फ बोर्ड भारतीय रेलवे और सेना के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी भूमि धारक संस्था है. वर्तमान में, इसके पास लगभग 8.7 लाख संपत्तियां हैं, जो 9.4 लाख एकड़ क्षेत्र में फैली हैं, और इनकी अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये है. विश्वभर में सबसे अधिक वक्फ संपत्ति भारत में ही मौजूद है, जो इसके महत्व को दर्शाती है.
सरकार के दावे
सरकार का दावा है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 से वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन और पारदर्शिता में सुधार होगा. नए कानून से वक्फ की परिभाषा, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और तकनीकी उपयोग में बदलाव होंगे, जिससे एकरूपता और जवाबदेही बढ़ेगी. साथ ही, मुसलमान वक्फ (रद्द) विधेयक 2024 के जरिए 1923 के पुराने कानून को समाप्त किया जाएगा, जिसे सरकार औपनिवेशिक और अप्रासंगिक मानती है.
हालांकि, मोदी सरकार को संसद में बहुमत के बिना अपने गठबंधन सहयोगियों और विपक्ष से सलाह लेनी पड़ी. जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) में कुछ संशोधनों के बाद यह विधेयक फिर से पेश किया जा रहा है.
विपक्ष और मुस्लिम समुदाय की चिंताएं
विपक्ष और कई मुस्लिम संगठन इस विधेयक को असंवैधानिक और राजनीति से प्रेरित मानते हैं. असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि वक्फ संपत्तियां निजी होती हैं, जबकि इस कानून के बाद सरकार उन्हें सरकारी संपत्ति मान सकती है. उनका दावा है कि बिना डीड के वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण नहीं हो सकता और अगर पंजीकरण नहीं हुआ तो सरकार उन संपत्तियों पर कब्ज़ा कर लेगी.
सांसद इमरान मसूद ने क्लॉज 2ए और 3 (सात) ई पर आपत्ति जताई, जिसमें उत्तर प्रदेश में वक्फ की 14,500 हेक्टेयर जमीन को सरकारी संपत्ति घोषित किया गया है.
डीएम के अधिकार से जुड़ा
विवाद का दूसरा पहलू डीएम के अधिकार से जुड़ा है. नए संशोधन में विवादित संपत्तियों पर फैसला डीएम के विवेक पर होगा, जिससे वक्फ बोर्ड के सर्वेक्षण अधिकार खत्म हो जाएंगे. इसके अलावा वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों और महिलाओं को अनिवार्य रूप से शामिल करने पर भी सवाल उठ रहे हैं.
इस विधेयक से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार हो सकता है, लेकिन इसके राजनीतिक और धार्मिक निहितार्थ भी हैं. सरकार जहां पारदर्शिता और कार्यकुशलता का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष और समुदाय इसे हस्तक्षेप मान रहे हैं. इसका भविष्य 2-3 अप्रैल 2025 को संसद में तय होगा.